रफ्ता रफ्ता जिंदगी चल रही है… ✍️ बाबा दीपक मोगरी ( तन्हा ) रफ्ता रफ्ता जिंदगी चल रही है, धीरे धीरे उम्र ढल रही है… रफ्ता रफ्ता… सुबह होती है और शाम ढलती है, थकी-थकी सी हर दोपहर गुजरती है। भाग-दौड़ में उलझा इंसान, अब खुद से ही दूर होता जा रहा है। रातों की ...
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